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खुशी कैसे मिलती है|happiness

खुशी की खोज

खुशियों को ढूंढा नहीं,बल्कि उसको पालना पड़ता है,उसकी खेती की जाती है,जिसके लिए बीज डालने पड़ते हैं।खुशियां हमारे विचार और सोच पर निर्भर करती है।इस खुशी को सबसे ज्यादा हमारे आसपास के लोग और सोच ही प्रभावित करती हैं।

Table of Contents

असली खुशी मस्तिस्क पर नियंत्रण से कैसे

सिर्फ अपने मस्तिष्क के विचारों को अपने नियंत्रण में रखकर हम अपनी खुशी को रिजर्व कर सकते हैं।खुशियां किसी वस्तु में नहीं होकर हमारी सोच और विचारों पर निर्भर करती है।हमें अपनी खुशियों को दूसरों में ढूंढने की जगह,हमारे खुद पर काम करने से मिलती है,क्योंकि हमारी खुशियां कभी भी दूसरों पर निर्भर नहीं होती,और अगर कहीं दूसरों पर निर्भर भी नजर आए तो इसे हम प्राप्त नहीं कर सकते क्योंकि खुशी को कहीं बाहर नहीं बल्कि,अंदर ढूंढना ही,इसको प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है।

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खुशी के लिए स्वयं को बदलना

खुशियों को प्राप्त करने के लिए जरूरी है हमें खुद को बदलना और खुद की मानसिकता को बदलना न की संसार और संसार की परिस्थितियों को बदलना।

खुश रहने के लिए हम मानव को यह जानना ज्यादा जरूरी है,कि हमें खुश रहने के लिए लोगों की आवश्यकता होती है,अपने परिवार की आवश्यकता होती है। परिवार का प्यार और उनका साथ,उनके साथ गुजरे लम्हे,और सुख-दुख के पल हमें खुशियों से भरते हैं।

खुशी के लिए सोच कर सोचें

खुशी को प्राप्त करने के लिए हमें अपनी सोच पर काम करना पड़ता है,अपने अहंकार और ईर्ष्या को छोड़ना पड़ता है।जब हम इन सब को छोड़कर अपने समाज और परिवार को प्राथमिकता देकर उसके साथ जुड़ने के लिए आगे बढ़ते हैं,तब हम आसानी से खुशी से जुड़ते चले जाते हैं,हमारा जीवन बदलने लगता है हम अपने आप को शक्तिमान ऊर्जावान और प्रसन्नचित् अनुभव करने लगते हैं

खुशी के लिए ध्यान

इसके बाद खुशी के लिए और अपने मस्तिष्क के अच्छे विचार को पैदा करने के लिए हम प्राणायाम और ध्यान की विधि को अपना सकते हैं जिससे हमारे मस्तिष्क में अच्छे विचारों की सप्लाई बनी रहती है।इस प्राणायाम और ध्यान से हमारे शरीर में रक्त का संचार मस्तिष्क से होते हुए सारे शरीर में दौड़ने लगता है जिससे हम मस्तिष्क की इन तरंगों से खुशी का अनुभव करने लगते हैं।

खुशी के लिए संस्कृति से जुड़ना

इसी तरह जब हम अपने धर्म से जूड़ते हैं,उनसे जुड़े किसी आध्यात्मिक पुरुष के संपर्क में आते हैं तो हमें धर्म से जुड़ी नई नई जानकारियां मिलती है जीवन जीने के नए-नए तरीके और अपनी चुनौतियों से लड़ने के नए-नए समाधान के रास्ते मिलते हैं इससे हमारी प्रसन्नता का स्तर बढ़ता जाता है

अपने मस्तिष्क को सभ्यता संस्कृति आध्यात्मिकता और मेंटर के साथ जोड़कर भी हम अपने मन मस्तिष्क को नए-नए ज्ञान के द्वारा ऊर्जावान बनाकर उसे नए-नए रसायन उत्पन्न करने में मदद कर,कंट्रोल कर सकते हैं। जब हम अपनी संस्कृति और सभ्यता को अपनाते हैं तो हम नए नए लोगों से जुड़ते हैं उनके विचारों को जानने का अवसर हमें मिलता है जिससे हमारे मस्तिष्क ज्ञान के नये नये अनुभव प्राप्त करता है इससे हमें खुशी मिलती है।

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खुशी के विज्ञान को जानें

आने वाली जीवन की खुशियों के बीज को बोना हमारे हाथ में है और इसके लिए जरूरी है हम जल्दी से जल्दी खुशियों की खेती प्रारंभ करें। खुश रहने के नए-नए तरीकों को जाने और इसके लिए हम नई-नई ज्ञान की पुस्तकें पढ़ें और उस मिले ज्ञान की तकनीक से खेती करना आरंभ करें जिससे हम भविष्य में खुश रह सके।इसके लिए आप हमारे ब्लॉग को भी गहराई से पढ़ सकते हैं इसमें खुश रहने के 100 से अधिक तरीके बताए गए हैं।

जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी हमारा परिवार

जिस चीज को हम बांटते हैं इस संसार का नियम है वह चीज निरंतर बढ़ती जाती है, वह चीज हमें ब्रह्मांड प्रचुरता से देने लगता है इसलिए खुशी को प्राप्त करने के लिए निरंतर खुशियों को,और ज्यादा समाज और परिवार के बीच बांटना शुरू करें।इसके लिए हम परिवार और समाज को अपनी क्षमता के अनुकूल मदद करने और उनके साथ समय बिताने के लिए हर समय तैयार रहें।जब हम किसी के साथ समय बिताते हैं तो उनके संपर्क में आने मात्र से हमारी शक्तियां बढ़ती जाती है हमारी खुशियों का स्तर बढ़ते जाता है। इससे हम खुद भी खुशियों का मजा ले पाते हैं और दूसरों को भी खुशी बांट पाते हैं।

सच्ची खुशी के लिए अपने मन को वश में करें

अगर हम मन के वश में हैं,तो हमारे जीवनमें संघर्ष चलता है,और हमारा मन यदि हमारे वश में है, तो हम खुशियों को आसानी से प्राप्त कर सकते है। इसलिए हम किसी भी वस्तु को प्राप्त करने से पहले अपने मन के विचारों से ना जूड़कर, अपने अंतिम निर्णय को अपनी बुद्धि और विवेक के द्वारा ले,और इस बात पर चिंतन करें की यह हमारे लिए उपयोगी होगीकी नहीं,यह हमारे खुशी की खेती स्वरूप काम करेगी या हमारे लिए नुकसान देह होगी। इस तरह विचार कर हम बुद्धि और विवेक के द्वारा ही निर्णय लें।

हमारे मन और हमारे दिमाग पर हम नियंत्रण मात्र से हम अपनी खुशी को आसानी से संजो सकते हैं।

हमारा मस्तिस्क

हमारा मस्तिष्क दो भागों में बटा होता है, लेफ्ट ब्रेन और राइट ब्रेन। लेफ्ट और राइट ब्रेन हमारा सही ढंग से सामूहिक रूप से काम कर सके इसके लिए निरंतर व्यायाम करना भी अति आवश्यक है। खुशियों की खेती के लिए व्यायाम का बहुत महत्व है। हमारे सभी निर्णय हमारे मस्तिष्क द्वारा लिए जाते हैं और मस्तिष्क को सारी सूचना हमारा बाया दिमाग ही देता है,जिसे हमारा मस्तिष्क दाहिने दिमाग में भेज कर अपना निर्णय देता है।यहां पर रक्त का परिभ्रमण जब पूरी तरह से सुचारू रूप से चलता है, तभी हमारे निर्णय सही होते हैं।इसके लिए हमें हमारी दैनिक दिनचर्या को व्यायाम से जोड़ना अति आवश्यक है। व्य्याम के द्वारा हमारा शरीर और उसके अन्य सभी भागों से रक्त का सुचारू रूप से संचार जब मस्तिष्क तक पहुंचता है, तभी हमें खुशी की अनुभूति होती है।

बॉडी में हर अंग के पास अपना दिमाग होता है।

हमारे सभी अंग अलग अलग ही अपना निर्णय लेते हैं इसे ऐसे हम समझ सकते हैं कि हम खाना खाते खाते टीवी देखते हैं तब खाना हम हाथों से खाते हैं और टीवी हम आंखों से देखते हैं, और टीवी पर सुनने वाली बातों को कान के द्वारा हम मन के पास पहुंचाते हैं,तो मन खुशी का अनुभव करता है हाथों के द्वारा हमारा भोजन मुंह में जाने से जीभ अलग खुशी का अनुभव करती है, कान अलग और हमारा हाथ अलग अनुभव करता है।

सोच पर निर्भर खुशी

हमारी खुशियां का पैमाना हमारी सोच पर निर्भर करता है।हम क्या सोचते हैं कैसा सोचते हैं उसी पर हमारा जीवन चलता है। हम आज जो भी है,जिस परिस्थिति में भी फंसे हैं,यह निश्चित रूप से पहले अतीत में हमने इसको मस्तिष्क में सोचा है,इसलिए हम अपनी सोच पर काम करें।सोच कर ही सोचें।सकारात्मक सोच से ही खुशियां समृद्धि सफलता मिलती है। जो हम अपने जीवन में घटित हुआ देखना चाहते हैं उन विचारों को ही सोचे,सकरात्मक सोच के बीजों को डालें तभी हम लगातार खुशी का अनुभव कर सकते हैं।

विशेष विचारों को महत्व

यह भी देखने में आता है हम अपने जीवन की नकारात्मक परिस्थितियों को ज्यादा महत्व देते हैं,जबकि सकारात्मक परिस्थितियों को ट्रालते रहते हैं,दबाते रहते हैं हमें अपनी सकारात्मक परिस्थितियों पर अधिक से अधिक चिंतन बढ़ाना चाहिए।

हमारा संग और खुशी

हमारे आसपास हम कैसे लोगों का संग करते हैं इस पर भी बहुत कुछ निर्भर करता है। इसे हम जिंदगी में हस्बैंड और वाइफ के रिलेशन से सीख सकते हैं।अगर हस्बैंड स्नेह और खुश मिजाज है तो वाइफ हमेशा खुश रहती है और अगर वाइफ खुश मिजाज है तो हस्बैंड हमेशा खुश रहता है।इसके विपरीत अगर किसी एक का भी स्वभाव खराब होता है तो वह दूसरे पर इफेक्ट करता है,इसी तरह हम अपने कार्यस्थल में भी जैसे लोगों का संग करते हैं वैसा हमारा मन और व्यवहार बनते चला जाता है।

खुशी बांटे

खुश रहने के लिए खुशियों को बांटना बहुत जरूरी है कोई हमारे साथ कैसा भी व्यवहार करे,हम उसे हर हालत में खुशियां ही देने का प्रयास करें क्योंकि जितनी हम खुशियां बांटते हैं उतने ही हम स्वयं खुश रहने लगते हैं अपने स्वयं और उसके व्यवहार से दुखी होने से बचते हैं। कई स्थितियों में अगर संभव न लगे तो उस व्यक्ति से दूर होने का प्रयास करना ही उचित है,उसे अप्रिय शब्द बोलना और अनुचित व्यवहार करना उचित नहीं।

इस तरह हम किसी से किसी से कोई काम करवाने के लिए जब उसे यह बताते हैं कि हम उसे इस काम के बदले यह देंगे तो वह काम करने के लिए तैयार हो जाता है उसी तरह अगर हम खुशियां मांगते और बांटते हैं तो यह सोचे की बीज स्वरूप हम यह करेंगे और उसके बदले हम भी इन खुशीयों को आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। जो हम देते हैं वही हमें बदले में मिलता है क्योंकि यह दुनिया आभार और बदले पर चलती है।

सत्य और सदाचार से खुशी

अपनी कमी को हम हर परिस्थिति में दूर करने की कोशिश करें। हर हाल में परिस्थिति के सच और परिस्थिति को समझने का प्रयास करें। हम सिर्फ अपनी जिम्मेदारी को निभाने का प्रयास करें।हम सिर्फ अपने कर्म करें,फल की इच्छा न करें, और सिर्फ अपने कर्तव्य के पालन में ही खुशी का अनुभव करें।

मन की संतुष्टि से खुशी मिलती है

किसी से अधिक लगाव करने से बचें।लक्ष्य के पहले मिलने वाले अनुभव ही हमको खुशी देते हैं।सच्ची खुशी लक्ष्य के पहले सीखी बातों से मिलती है।

खुद पर नियंत्रण

स्टेटस को दिखाने के लिए फिजूलखर्ची से बचें और अपने परिवार की खुशी के लिए खर्च करें। ऐसी चीजों पर खर्च करें जो पूरे परिवार को खुशी देती हो और लंबे समय तक खुशी दे।दूसरों को दिखावा कर खुशी के लिए खर्च करने से बचें।

खुशियों के लिए अपनों से जुड़े रहे

हर परिस्थिति में हम अपने लोगों के साथ ही रहे,अपने वे जिन पर हम पूरा भरोसा रखते हैं जो हर परिस्थिति में हमारा साथ देते हैं।क्योंकि यह लोग ही हमें निर्भय बनाते है,जिससे हम खुशी महसूस करते हैं,जिससे हमारे मन में संतुष्टि और भरोसा आता है। अपनों का साथ हमें जीवन के उन दोनों परिस्थिति से बचाता है जिसके एक पलड़े पर खुशी और दूसरे पर चुनौती की परिस्थितियां होती है, और फिर अंतत इससे हम खुशी का अनुभव करते हैं। जीवन में जब प्यार और अपनों का साथ होता है तभी हम खुश रह पाते हैं।

ऐसा देखने में आता है जो लोग परिवार और समाज के साथ जुड़े रहते हैं उनकी जिंदगी लंबी और खुशहाल होती है।ये जीवन भर मुस्कुराते और हंसते हुए अपना जीवन अपने परिवार और समाज के साथ जूड़ कर व्यतीत करते हैं।

हर उम्र के नए-नए साथी

अलग-अलग उम्र में हम सब मानव अलग-अलग लोगों के साथ जीवन बिताने में खुशी का अनुभव करते हैं जैसे हम 8 साल की उम्र तक अपने माता-पिता के साथ,8 से लेकर 20 साल की उम्र तक हम अपने मित्रों के साथ और 20 के बाद का समय हम अपने जीवन साथी के साथ बिताना पसंद करते हैं।

चुनौती और खुशी

चुनौतियां हमारे जीवन में नए सबक और अनुभव देने और विकास के लिए हमारे जीवन में आती है।इन चुनौतियों के अंदर अवसर छिपे होते हैं,जो हमें खोजने और पहचानने होते हैं,जो हमारी खुशी का कारण बनते हैं।

आदत और खुशी

अच्छा करने की आदत बनाते रहने से भी हमें लगातार खुशियां मिलती है और ऐसा हर धर्म में देखा जाता है। ऐसा हो सकता है यह यह आदतें और क्रियाएं अलग अलग धर्म में अलग अलग हो,किंतु अच्छा करने की आदत बनाने वाले लोग हमेशा खुश देखे जाते हैं।

अपने काम से प्रेम

अपने कर्तव्य और दायित्व को अपनी जिम्मेदारी समझकर बखूबी निभाने वाले लोग भी खुश नजर आते हैं।वे हर परिस्थिति में अपना काम ईमानदारी और सच्चाई से करते हैं जो उन्हें मन की संतुष्टि और खुशियां देती है।

दूसरों की मदद करने के लिए आगे रहने वाले

दूसरों की चुनौतियां को हल करने वाले, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए तन मन धन से मदद के लिए तैयार रहने वाले के ऊपर ब्रम्हांड और ऊपर वाले की विशेष कृपा देखने में आती है।वे हर स्थिति में प्रचुरता, समृद्धि,सफलता और धन को प्राप्त करते हैं। अपने जीवन में परिवार और मित्र के साथ जुड़कर आनंद और हर्षोल्लास के साथ जीवन व्यतीत करते हैं।

पवित्रता और स्वच्छता

पवित्रता और स्वच्छता भी हमें हमारे जीवन में खुशियों की तरंगे महसूस कराती है।ऐसा देखा जाता है जब हम किसी पवित्र और साफ-सुथरे स्थल पर भ्रमण के लिए जाते हैं तो हमारा मन खुशी और उमंग से भर जाता है।इसी तरह जब हम किसी पांच सितारा होटल में जाते हैं जहां सब चीजें व्यवस्थित होती हैं,वहां भी हमें खुशियों की अनुभूति होती है। इसलिए खुशी के लिए व्यवस्थित और अनुशासित तथा नियमित और नियंत्रित होना भी जरूरी है। हम निश्चिंत होकर पवित्रता और स्वच्छता से जुड़कर खुशी की अनुभूति कर सकते हैं

चरित्र और सदाचार का पालन करने वाले लोग भी खुश नजर आते हैं

खुद में दिव्य तेज और औरा बढ़ाने के लिए काम करने से भी मन में उत्साह आनंद की वृद्धि होती है।इसके लिए हम अपनी आत्मा की दिव्यता पर काम करें। इसके लिए कुछ क्षण प्रकृति के बीच जाकर ईश्वर,उस परम सत्ता का ध्यान करें, अनुभव करें। इससे जुड़ने के लिए हम अपनी सांसों को प्राणायाम के द्वारा, तन मन और परमात्मा की शक्ति, वायु शक्ति के पुल द्वारा उस परम सत्ता से आसानी से जुड़ सकते हैं।इससे हमारे अंदर दिव्य तेज उत्पन्न होता है जो हमें शांति और आनंद देता है।

सबका साथ और सबका विकास

सबका साथ होना भी हमें खुशियों की ओर ले जाता है।जब भी हम जीवन में कुछ प्राप्त करते हैं तो किसी को दिखा कर या बता कर ही खुशी का अनुभव करते हैं।इसके लिए हमें अपनों के साथ की जरूरत होती है। जब हम इस सफलता के पैमाने को बड़ी उपलब्धि से हासिल करने लगते हैं तो यह हमें जन मानस की और आकर्षित करता है।इसके लिए बहुत जरूरी है कि हम स्वयं के साथ-साथ सब के विकास के लिए भी ध्यान दें सबकी जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करें।सब को प्यार देना और सबका साथ अनुभव करना होना हमें जीवन में प्यार और खुशी देता है।

खुशी खुशी खुशी हम सब मानव की मांग

इस तरह इन सब बातों को जानना और जानकर अपने जीवन में उतारना ही हमें खुशी देता है और यह खुशी हम सबकी जरूरत और मांग भी है, इसके लिए हमें इस खुशी को प्रधान विषय के रूप में कक्षा मे सीखना पढ़ना और जानना जरूरी है।

जय श्री कृष्ण

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