Rashtriya Khel Divas

राष्ट्रीय खेल दिवस (Rashtriya Khel Divas) 29 अगस्त।

भारतीय राष्ट्रीय खेल दिवस (Rashtriya Khel Divas). इस पूरी दुनिया मे बहुत प्रकार के खेल खेले जाते है , और हर देश का एक अपना राष्ट्रीय खेल दिवस होता है, बिलकुल इसी तरह भारत देश मे भी राष्ट्रीय खेल दिवस बनाया जाता है। लोग खेल को विभिन प्रकार के रूप मे खेलते है। उन्हें हम खेलकूद, कला क्रीडा या व्यायाम कहते हैं।इस खेल से शरीर और मस्तिष्क में तीव्र गति से रक्त संचार की क्रिया बढ़ जाती है।

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खेल (Rashtriya Khel Divas) से जुड़े कुछ ऐसे प्रश्न जिन्हें आपको जानना चाहिए।

खेलना क्यों जरूरी है ?

खेल की कोई उम्र नहीं होती।शारीरिक खेल व्यायाम और प्राणायाम से तन के साथ मन भी स्वस्थ रहते है।खेलने वाले व्यक्ति के 2 गुणों में निश्चित रूप से वृद्धि होती है एक तो वह अंत तक हार नहीं मानता है, दूसरा वह खुद को बेहतर बनाने के लिए निरंतर अभ्यास करता है।वह हमेशा, जीतने का प्रयास करता है। खेलना शिक्षा का एक अनिवार्य अंग है क्योंकि एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। खेल ही हमारे शरीर को हष्ट पुष्ट, गतिमान, फुर्तीला और स्वस्थ बनाता है। जिस तरह शिक्षा के लिए पुस्तकों का होना अनिवार्य है उसी तरह शारीरिक विकास के लिए खेलकूद का होना अनिवार्य है, इसलिए शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद के महत्व के प्रति बच्चों में जागरूकता बढ़ाना, आने वाली पीढ़ी के लिए अति आवश्यक है।

भारत का राष्ट्रीय खेल दिवस ( Bharat Ka Rashtriya Khel Divas)

इस राष्ट्रीय खेल दिवस (Rashtriya Khel Divas) को हॉकी के महानायक मेजर ध्यानचंद के जन्म उपलक्ष में 29 अगस्त 2012 को सर्वप्रथम मनाया गया।इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं में खेल की भावना को बढ़ाना,उसके महत्व को जन-जन में फैलाना है।

भारत का राष्ट्रीय खेल

Rashtriya Khel Divas

क्योंकि हम युवाओं में आजकल क्रिकेट का काफी आकर्षण है इसे ही हम खेलना और देखना पसंद भी करते हैं किंतु हमारे भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी है इसे भी जानना हर युवा और बच्चों को जरूरी है।

खेलने के लाभ

खेलकूद से विद्यार्थियों में नेतृत्व,आज्ञा पालन समान लक्ष्य के लिए मिलकर काम करना, साहस, सहनशीलता, धैर्य जैसे आवश्यक सभी गुणों का विकास होता है।इन गुणों से संपन्न स्वस्थ शरीर के बालक ही आगे चलकर देश के सुयोग्य नागरिक बन सकते हैं।

खेल खेलना शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से बच्चों की शक्ति को विकसित करता है।खेलने के दौरान जो पसीना हमारे शरीर से निकलता है उस पसीने के माध्यम से शरीर के विषाक्त पदार्थ भी बाहर निकल जाते हैं, जिससे हम स्वयं को स्वस्थ और तरोताजा महसूस करते हैं। खेलों के नियमों की पालन करने की वजह से बच्चों में अनुशासन बढ़ता है,और विभिन्न खिलाड़ियों के साथ मिलजुलकर खेलने से उनमें टीम बनाकर जीवन में आगे बढ़ने की भावना भी बढ़ती है विकसित होती है।

 

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खेल के प्रकार

खेल दो तरह के होते हैं एक इंडोर और एक आउटडोर।इंडोर खेल में लूडो कैरम के साथ लुडो, सांप सीढ़ी जिनमें मनोरंजन के साथ-साथ बौद्धिक विकास होता है।इसके दूसरी ओर आउटडोर खेल जैसे फुटबॉल हॉकी बैडमिंटन टेनिस वॉलीबॉल क्रिकेट आदि खेल आउटडोर की श्रेणी में आते हैं। आउटडोर खेलों के लिए बड़े मैदान और बड़ी जगह की आवश्यकता होती है जबकि यह खेल हमारे शरीर को फिटनेस और तंदुरुस्त बनाए रखने में सहायक होते हैं जबकि इंडोर गेम घर आंगन अपने ऑफिस या किसी भी छोटे कमरे में खेले जा सकते हैं।आउटडोर खेल हमारे शारीरिक विकास के लिए लाभकारी होते हैं।हमारे शरीर को स्वस्थ सुडौल और सक्रिय बनाए रखते हैं।

शिक्षा और खेल

विद्यालयों में व्यायाम प्राणायाम और खेलकूद के लिए शिक्षकों को अनिवार्य रूप से नियुक्त इसीलिए किया जाना चाहिए कि प्रत्येक बालक उनके निरीक्षण में अपनी रुचि के अनुसार खेलकूद में भाग ले सकें और अपने स्वास्थ्य को हस्ट पुष्ट बना सके।

खेल से संबंधित प्रेरणा

खेल में जीतने वाले की सबसे खास बात यह है उसकी मेहनत उसको नया जस्बा प्रदान करती है ,खेल से हमें यह प्रेरणा और शिक्षा भी मिलती है कि हम कभी भी हार को दिल पर ना लें। अपनी हार से सीखें और अपनी गलती और कमी को सुधारने का प्रयास करें।खेल में जिस तरह कभी-कभी अच्छा खिलाड़ी भी शून्य पर आउट हो जाता है, उसी तरह जीवन के उतार-चढ़ाव के काफी अनुभव होने के बाद भी हमें जीवन में हारना पड़ता है।

खेलने से व्यक्ति के जीवन में हर कार्य में जीतने की भावनाएं प्रबल होती है। इस भावना के प्रबल विकास से वह हर हाल हर शक्ति से जीतने और सफल होने का प्रयास करने लगता है। इस खेलने से जीवन में आत्मविश्वास बढ़ता है।

खेल और स्वास्थ्य का संबंध

खेलने वाला व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रह सकता है। उसका शरीर किसी भी तरह के रोगों की चुंगल में नहीं फसता। वह हर समय स्वस्थ और प्रसन्न मुद्रा से अपने काम को अंजाम देता है। किसी ने खूब कहा है जिसे खेल व्यायाम और स्वास्थ्य के लिए समय नहीं मिलता उसे बीमारी के लिए समय निकालना पड़ता है इसलिए खेलने का महत्व युवाओं और बच्चों में बढ़ाना अति आवश्यक है।

खेल का उदेश्य

खेल से निष्ठा और ईमानदारी की भावना परिश्रम और आत्मविश्वास ,की शक्तियाँ खिलाड़ी को एक महान और प्रतिभाशाली व्यक्ति बनने की प्रेरणा भी देती है। इस खेल के प्रभाव से ध्यान शक्ति में प्रचूर वृद्धि होती है।हमारा ध्यान इन खेलों के दौरान एकाग्रता से टिकने की आदत बनाने में सक्षम होता है जिससे हम अपने कर्म के दौरान भी ध्यान से अपने काम को अंजाम दे पाते हैं।

इस दिन को युवा और बच्चों में और आकर्षक बनाने के लिए हर स्कूल और कॉलेज में अवार्ड डिस्ट्रीब्यूशन या इनाम की कोई योजना बनाई जाए,जिसके तहत उसी स्कूल कॉलेज के किसी पूर्व विद्यार्थी के नाम पर उस अवार्ड का डिस्ट्रीब्यूशन किया जाना बच्चों में प्रेरणा बढ़ा सकता है।

खेलों का इतना महत्त्व देखने के बाद यही महसूस होता है इन खेलों को खेलना अति अनिवार्य है।जबकि वर्तमान समय में बच्चे इंडोर खेल की तरफ आकर्षित हो चुके हैं और उनका आउटडोर खेल की तरफ से रुझान खत्म सा हो गया है।इन खेलों को बढ़ावा देने के लिए फिर से नई नई योजना को बढ़ावा देना जरूरी है

खेल में जीत की बधाई

मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी इस दिन को प्रोत्साहन देने के लिए खेलो इंडिया का नारा 2018 में दिया। खेलों में बच्चों का प्रोत्साहन बढ़ने से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेलों के माध्यम से हम सारे विश्व में अपने देश का नाम रोशन कर सकते हैं। हमारा राजनेता खेलों का प्रोत्साहन बढ़ाने के लिए समय-समय पर खिलाड़ियों की जीत पर उन्हें बधाई दे,और सोशल मीडिया पर उन खिलाड़ियों के मान सम्मान में खबरें अधिक से अधिक चलाई जानी चाहिए जिससे देश का गौरव भी बढ़ता है और युवाओं में इन खेलों के प्रति आकर्षण भी बढ़ता है।

खेलों पर आधारित कई प्रेरणाजनक और प्रोत्साहन देने वाली मूवी को स्कूल के ऑडिटोरियम में दिखाया जाए। जैसे दंगल, m.s. धोनी, मैरी कॉम,चक दे इंडिया, भाग मिकखा भाग आदि।

व्यापक अर्थ में शिक्षा का तात्पर्य मानसिक शिक्षा या विकास से नहीं है बल्कि सर्वांगीण विकास से है और इस सर्वांगीण विकास के लिए खेल कूद और व्यायाम का विशेष महत्व है। आजकल की व्यस्त दिनचर्या में खेल ही एकमात्र ऐसा साधन है जो मनोरंजन के साथ-साथ हमारे शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक है जो हमारे शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त बनाए रखता है। इसके प्रभाव से हमारे नेत्रों की ज्योति भी बढ़ती है, हड्डियां मजबूत होती है,रक्त संचार उचित रूप से होता है,तथा हमारा पाचन तंत्र भी पूर्ण रूप से कार्य करता है।

इन खेलों के प्रभाव से हमारी मानसिक शक्ति भी बढ़ती है हमारा ध्यान का विकास होता है और शरीर के बाकी अंग भी पूर्ण रूप से काम करने लगते हैं।यह खेल हमें आलस्य से दूर रख, हमें ऊर्जावान स्फूर्तिवान बनाकर रखता है।

खेलकूद से युवाओं और बच्चों में उत्साह उल्लास और उमंग बढ़ता है जिसके प्रभाव से उनकी शिक्षा में भी रुचि और ध्यान धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं।ऐसा देखने में भी आता है जो बच्चे खेलकूद में तेज होते हैं वे पढ़ाई में भी आगे रहते हैं।

स्वास्थ्य ही धन है ऐसा हमारे ऋषि मुनि धर्म वेद पुराण सब कहते आए हैं।स्वास्थ्य हमारे जीवन की आधारशिला है।एक स्वस्थ मनुष्य ही अपने जीवन संबंधी सभी कार्यों को भली-भांति और पूर्ण रूप से कर सकता है। इस खेलकूद के द्वारा स्वच्छ वायु और खुले वातावरण में सारे शरीर की कसरत अपने आप हो जाती है,और सारे दिन अपनी पढ़ाई से को करते-करते जब युवा थक जाते हैं तो उन्हें बड़ी आसानी से मनोरंजन भी मिल जाता है। शरीर और मन स्फुर्तिवान और आनंदित हो जाते हैं इसीलिए यह कहा गया है कि काम के समय काम और खेल के समय खेल सुख और प्रसन्नता का यही मार्ग है।

इसके अलावा पहला सुख निरोगी काया, एक तंदुरुस्ती हजार नियामक,जान है तो जहान है।

खेल भी शिक्षा ही

इन सभी बातों का एक ही अभिप्राय है कि हमारे स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए हमारी खेलकूद में रुचि का होना अति आवश्यक है इसलिए इसका प्रोत्साहन और जागरूकता का होना युवाओं और बच्चों में अति आवश्यक है।खेल युवाओं के लिए सबसे बड़ा शिक्षक है, जो उन्हें सफलता समृद्धि ज्ञान वैभव स्वास्थ्य शक्ति और खुशियां ही खुशियां जीवन भर दे सकता है।

जय श्री कृष्ण

धन्यवाद

Nirmal Tantia
मैं निर्मल टांटिया जन्म से ही मुझे कुछ न कुछ सीखते रहने का शौक रहा। रोज ही मुझे कुछ नया सीखने का अवसर मिलता रहा। एक दिन मुझे ऐसा विचार आया क्यों ना मैं इस ज्ञान को लोगों को बताऊं ,तब मैंने निश्चय किया इंटरनेट के जरिए, ब्लॉग के माध्यम से मैं लोगों को बताऊं किस तरह वे आधुनिक जीवन शैली में भी जीवन में खुश रह सकते हैं

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