विवाह क्या है? | शादी जीवन का सबसे बड़ा त्यौहार | इस त्योहार को कैसे मनाएं | Marriage is the biggest festival of life
शादी एक शब्द नहीं बल्कि हमारे जीवन का पूरा एक ग्रंथ है। शादी जीवन का एक बड़ा उत्सव है ,बड़ा त्योंहार है ,जो बार-बार नहीं आता ना ही यह बार-बार होता है जैसे की होली या दिवाली हर वर्ष होते हैं।
यह हम माता पिता और हमारे बच्चों के लिए जीवन का सबसे बड़ा महोत्सव होता है ।इसके आयोजन को हमारे रिश्तेदार, परिवार के लोग, पड़ोसी और हम से जुड़े आर्थिक जगत के सभी हमारे संगी, साथी आनंद लेते हैं और खुशी का अनुभव करते हैं।
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यह दो परिवार के बीच संबंध है
इसके लिए हमें योजना बनाकर तैयारी करनी चाहिए जो हमें वर्तमान और भविष्य दोनों में खुशियां देती हैं।शादी जीवन का ऐसा संस्कार है जो दो पीढ़ियों को जोड़ता है! दो परिवारों को जोड़ता है, उनमें खुशियों का संचार करता है।
शादी करने के लिए लड़का लड़की अपने मन से चुनाव न करें यथा संभव माता पिता और अपने अभिभावक, शुभचिंतक ,और अनुभवी पुरुषों की अनुमति से करें तो यह जीवन भर उन्हें खुशियां दे सकता है।ऐसा हमारे शास्त्रों में कहा जाता है।और ऐसा इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने काफी अनुभव लिया रहता है और वो हमारे लिए उचित और अनुचित का ज्यादा अनुभव दे सकते है। कम से कम सलाह तो उनसे अवश्य लें।
इसके अलावा अभी का माहौल थोड़ा अलग सा भी हो रहा है इसमें बच्चे अपनी पसंद के लड़के या लड़की से पहले पसंद करके प्रेम कर शादी कर रहे हैं ।
इसमे कुछ शादी सफल कुछ असफल भी हो रही है। बच्चे अलग जाति के लड़के और लड़कियों से भी शादी कर रहे हैं जिसमें निभाव होना काफी मुश्किल होता है तो हमें इसे भी समझना चाहिए।इस समय तो जरूर बड़े बुजुर्ग की सलाह पर गौर करें।
कुछ बच्चे आजकल शादी करना नहीं चाहते अकेले रहकर ही जीवन बिताना चाहते हैं ।कुछ की शादियां हो नहीं पाती ,कुछ कुंवारे भी रह जाते हैं। तो उनके लिए यह संदेश है।
लड़की के लिए शादी करना बहुत जरूरी
यदि लड़का है तो शादी नहीं करने से भी चल सकता है, किंतु लड़की के लिए शादी करना बहुत ही जरूरी है। क्योंकि एक उम्र के बाद नारी के शरीर में कई तरह के परिवर्तन आते हैं इसके लिए उसे सदैव किसी साथी की जरूरत होती है और अगर वह शादी नहीं करती तो उसे जीवन यापन में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है! क्योंकि माता-पिता तो एक उम्र के बाद साथ छोड़ ही देते हैं, फिर वह इस संसार में वे अकेली हो जाती है, और उन्हें चुनौतीपूर्ण जीवन जीना पड़ता है।और वे अगर विवाह कर लें तो पति ही माता ,पिता ,भाई, बहन,मित्र की अकेला सारी जिमेदारी निभा देता है।
शादी करना इसलिए भी जरूरी है कि यह हमारे जीवन के एकांत को दूर करता है क्योंकि हमें एक जीवनसाथी की बराबर आवश्यकता रहती है।
शादी दो आत्माओं का मिलन है, दो आत्माओं की दोस्ती करना शादी है ।दो अलग-अलग सोच के इंसानों में शादी सफल नहीं हो पाती इसलिए हमें एक दूसरे की सोच को समझना है ।जिस तरह दोस्ती में हम एक दूसरे के विचारों की फ्रीक्वेंसी के मैच होने पर ही बहुत दिन तक निभा पाते हैं और खुश भी रह पाते हैं इसी तरह शादी भी दोस्ती की तरह है अगर हमारे विचार हमारी सोच नहीं मिलती तो हम दोनों ही प्रसन्न नहीं रह पाते।
चूंकि हमारा मन निरतर कुछ न कुछ बोलना और अपने विचारों को प्रकट करना चाहता है, सो यह हमारा काम साथी के माध्यम से होता है।
हमारे जीवन का एकांत दूर होता है।शादी करने से ही एक समय के बाद हम अपने जीवन को खुशी खुशी यापन कर पाते हैं क्योंकि हमारे इर्द-गिर्द हमारे परिवार और बीबी , बच्चे होते है, जिनके साथ हम खट्टे मीठे अपने अनुभवों को शेयर कर पाते हैं और खुशी महसूस करते हैं।
शादी करने से जीवन के नए नए अनुभव मनुष्य अपने जीवन साथी के साथ लेकर आनंदित होता है और प्रसन्नता का अनुभव करता है ।शादी करने से जो हमारा वास स्थान होता है वह निवास बन पाता है ।क्योंकि इससे धीरे-धीरे घर में बच्चे भी होते हैं ।और हमारा घर पूर्ण हो पाता है।
शादी सिर्फ मनुष्य करता है ,क्यों की उसे समाज और रिश्ते की जरूरत|
इस दुनिया में मानव को सर्वश्रेष्ठ योनि माना जाता है !और अन्य किसी भी योनि में यह शादी नहीं होती जबकि इस मानव में ही विवाह रुपी बंधन में बंध कर जीवन साथी के साथ रहने की दिशा निर्देश दिए गए हैं।
शादी एक तरह का नाटक है और इस किरदार को निभाने के लिए हम एक दूसरे के प्रति यदि आशाएं ना रखें और यह समझ ले की हम दो अलग हैं तो यह हमारे लिए ,इस युग में बड़ा ही उत्तम उपहार हो सकता है।
शादी में कौन क्या देखता है।
शादी में लड़की के विवाह के लिए पिता लड़के का पुरुषार्थ देखता है ,लड़की जो होती है वह लड़के का सौंदर्य देखती है,माताएं वर का धन देखती है ,वैभव देखती है, बराती विवाह में मिठाई देखते हैं ,और हमारे खानदान के लोग परिवार देखते हैं! किस परिवार से हमने संबंध जोडा है।
No secret in family members
शादी की जब बात हो रही हो तो अपने मन में कोई भी तरह की बात कभी नहीं छुपाए क्योंकि इससे बाद में सिर्फ दुख ही उठाना पड़ता है ,और कोई उपाय नहीं रहता ।यह बात सभी परिवार के सदस्यों पर लागू होती है कि वे कोइ भी सदस्य अपने मन की बात परिवार से कभी ना छुपाएं।
शादी का मतलब जीवन का सबसे बड़ा त्यौहार|
शादी का मतलब जीवन का सबसे बड़ा त्यौहार। क्योंकि यह शादी हमारे सारे जीवन काल में सिर्फ एक बार ही होती है और शादी ही एक ऐसा त्यौहार होता है जिसका आनंद,,जिसकी ख़ुशी का एहसास हम स्वयं अनुभव करते हैं । हमारे माता पिता हमें जन्म देते हैं, दोस्त हमें खुशियां देते हैं, किंतु इस शादी से हमें जो लाइफ पार्टनर मिलता है वह हमें लाइफ देता है ।इसलिए इस शादी या शादी से जुड़े किसी भी चीज का उपहास नही करें। उसे अपने जीवन के लिए गंभीरता से लें सबसे इस बारे में सलाह लें और अपने सब निर्णय लें।
शादी का मतलब एक नया रिश्ता एक नया प्यार। नई पीढ़ी का आगमन।इस मौके पर सभी मेहमान हमे आशीर्वाद देने आते हैं। वे अगर आशीर्वाद देने हमें आते हैं और अगर आशीर्वाद सभी एक तरह का देते हैं तो उन्हें गिफ्ट देना हो तो वह एक तरीके का ही दें ,यह आपका मान बढ़ाता है।
अगर आप मेहमान हो किसी शादी में, तो हमें गिफ्ट जरूर देना चाहिए यह परंपरा भी है और हमें जरूर देना चाहिए कि यह सदा हमारी यादों के रूप में उनके दिलों में हमें जिंदा रहेंगी।
कार्ड जरूर स्वयं जाकर दे। नो इंटरनेट इन्विटेशन।
शादी के कार्ड जरूर बाटे, स्वयं देने जाएं, और उनको भी दे, जिन्हें हम सोचते हैं वह नहीं आएंगे !क्योंकि शायद वे लोग यह सोचते हैं कि हम उनको बुलाएंगे तो वे आएंगे।
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शादी एक परिवार का उत्सव इसका आयोजन थोड़ा यूनिक तो बनता है
अब तो शादी में 2 घंटे की होने लगी किंतु शादी है भाई महोत्सव की तरह होनी चाहिए भागम भाग भरे जीवन में शादी को किसी रिसोर्ट में यदि संपन्न किया जाए तो 5 से 7 दिन इसे एक उत्सव स्वरूप मना कर हम सब आनंदित हो सकते हैं और यादगार बना सकते हैं ।शादी के लिए इसकी तैयारी पूर्व से कर लेनी चाहिए।
सभी परिवार के सदस्य साथ में आनंद उठा सकते हैं!
प्रकृति की गोद में रिसोर्ट एनएच6 कलकाता
रिसोर्ट में शादी होने से छोटे मेहमान यानी बच्चों को भी हमारे परिवार, रिश्तेदार के बच्चों को भी खेलने कूदने के लिए मैदान ,झूला, आउटडोर गेम, इंडोर गेम और साइकिलिंग तथा स्विमिंग की सुविधा मिल जाती है जिसे वे भुला नहीं पाते।
रिसोर्ट में शादी होने से जहां बार बार आना जाना नहीं पड़ता नहीं पड़ता, हमारे घर की महिलाओं को खूब सजने सवरने का समय मिलता है और वे भी खूब प्रसन्न मुद्रा में हर आयोजन का आनंद ले पाती है।
शादी के 5 से 7 दिन के कार्यक्रम में हम 1 दिन का सत्संग कार्यक्रम भी रखें जिसमें बच्चों को विवाह के उपरांत या बाद में कैसे जीवन जीना है ,यह सिखाया और बताया जाए। उन्हें कैसे अपने दैनिक जीवन में एक दूसरे के साथ रिश्तो को संजोना है, बताया जाए इसमें परिवार के सभी लोग शामिल हों, और एक साथ इसका आनंद लिया जाए तो सबके लिए शिक्षा होती है।एक साथ सुनने का अवसर मिले, तो इससे परिवार में सुख, शांति बढ़ती है। शादी के बाद का जीवन सुखी और आनंदमय होता है। इस बात को भी बताया जाए यह दो परिवारों के बीच रिश्ता जुड़ा है ,जिसका हम सब को मान रखना है ,और यह सब बातें सभी सदस्य एक साथ सुने तभी लाभप्रद होती है।
इसके अलावा एक दिन हम प्रश्नोत्तरी का कार्यक्रम घर और परिवार के बड़े बुजुर्गों के साथ भी रखें, जिसमें वे नए वर वधु को, अपने अपने जीवन का अनुभव बताएं, और उनके मन में कोई प्रश्न हो और वे पूछें तो वे उसका भी उत्तर दें।
शादी संपन्न कराने के लिए किसी रिसोर्ट या होटल का चयन करने के लिए इसलिए कह रहा हूं इससे दूर दूर से शादी की सभी रस्म का आनंद लेने के लिए बार बार आना जाना नहीं पड़ता ।परिवार के सभी सदस्य यहां इकट्ठे होकर एक साथ इसका आनंद ले पाते हैं।
आजकल रिसोर्ट के अंदर हम किसी भी जाति से रहे सब तरह की धार्मिक मंदिर आदि की व्यवस्था और खाने पीने की व्यवस्था भी उपलब्ध रहती है।वैसे यदि हम चाहें तो अपने मनोनुकूल रिसोर्ट या होटल का प्रबंध कर सकते हैं जहां हमारे मनोनुकूल सारी व्यवस्था उपलब्ध हो।
सभी मेहमानों को इस अवसर के दौरान रिसोर्ट या होटल में उपलब्ध अलग–अलग एक–एक कमरे दे दिए जाएं तथा कौन सा कार्यक्रम किस समय आयोजित होगा तथा होटल के किस हॉल या गार्डन में आयोजित होगा, उसकी सूचना सूची सभी कमरों में 1 रखवा दी जाए उससे बार–बार किसी को पूछना और बताना भी नहीं पड़ता और सभी आनंद लेते हुए अपने समय पर वहां उपलब्ध हो जाते हैं और आनंद ले पाते हैं।
शादी के इस आयोजन में जहां तक संभव हो चूंकि यह एक धार्मिक संस्कार भी है निरामिष खाने का उपयोग किया जाए। पूर्ण शाकाहारी और स्वादिष्ट भोजन बनाया जाए, क्योंकि इसमें हम हिस्सेदारी स्वरूप हमारे बुजुर्ग या जो इस दुनिया में नहीं है जिन्हें पितर भी कहा जाता है उनके लिए भी अलग रखा जाता है।हमारे कुल के ब्राह्मण और धार्मिक रीतियों से जुड़े मनुष्य भी इस आयोजन में भाग लेते हैं इसलिए पूर्ण शाकाहारी भोजन का आयोजन किया जाए तो यह लाभकारी है।
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जहां तक हो सके हम शादी का आयोजन सूर्य की उपस्थिति में करें जो कि आजकल हम शाम के वक्त करने लगे हैं। हर शुभ काम हमारे देश ,हमारी संस्कृति में सूर्य देव की उपस्थिति में होता रहा है। गोधूली तक ही इस संस्कार का आयोजन किया जाता रहा है । आजकल हम इसे भी नजरअंदाज कर रहे हैं ।और सारे कार्यक्रम रात को 10:00 बजे 9:00 बजे ,शाम के बाद अर्धरात्रि को कर रहे हैं।
बारात के दौरान शादी में हम बैंड बाजे के प्रयोग से बचें क्योंकि यह पाश्चात्य देशों में युद्ध के दौरान बजाए जाते हैं। हमारे देश में बारात के दौरान ढोल ,ढोलक , तुरही ,शहनाई, बांसुरी ,इत्यादि से माहौल को बहुत ही सुगंधित और रोमांचित बनाया जाता रहा है।
बारात में हाथी ,घोड़े ,रथ का प्रयोग किया जाए। आधुनिक समय में तरह तरह की गाड़ियों का जहां प्रयोग किया जाता है वह भी बारात के दौरान बारात की शोभा बढ़ाता है।
समय-समय पर यथा समय पर फूलों की बारिश हो और ब्राह्मण द्वारा यदि शांति पाठ होता रहे, तो अति उत्तम है।
इस दौरान सुंदर वाणी से कुछ स्त्रियां, मीठे मीठे गीत गाती रहे तो वह माहौल को और सुंदर बनाता है।
इस दौरान मिठे मिठे स्वरों से ब्राह्मणों का एक ग्रुप वेद ध्वनि का उच्चारण करें यह माहौल को और सुंदर बना कर ऊर्जा बढ़ाता है।
कुल पुरोहित के साथ बारात में वर का पिता अपने भाई और रिश्तेदारों के साथरहे। चारों तरफ वेद की ध्वनि, शंखनाद, और फूलों की बारिश! इस तरह बारात गणेश और कुल की देवी और देवता का स्मरण करते हुए चले।
समधियों के मिलन के समय फूलों की बारिश माहौल को बहुत ही सुंदर बनाती है। सभी बारातियों का मान सम्मान भी उत्तम वाणी द्वारा किया जाए।
बारात के स्वागत में दूध, शरबत ,ठंडाई ,जल आदि का प्रयोग करें फल और पकवान भी स्वागत के लिए आगे भेजे जाएं इससे सभी मेहमान प्रसन्न होते हैं।
बारात का स्वागत करने के लिए कन्या पक्ष के गुरु, ब्राह्मण ,मंत्री, गण और विद्वान तथा कन्या के पिता स्वयं आगे आकर सभी बारातियों का स्वागत करें उन्हें गले लगाएं आजकल विवाह में बारात के दौरान मदिरा आदि का प्रयोग बढ़ रहा है जिसका निषेध हमें पूर्ण रूप से करना चाहिए। क्योंकि इस विवाह संस्कार में हमारे सभी अदृश्य शक्तियों भी सम्मिलित रहती है, ऐसा हमें जानकर इससे बचना चाहिए।
शादी एक पवित्र बंधन है, जिसे हमें खुशी खुशी आनंद के साथ अग्निसाक्षी लेते हुए ,अग्नि के समक्ष फेरे लेते हुए सप्तपदी गाते हुए ,सातों वचन देकरऔर विवाह के दौरान जो विवाह मंडप में शिक्षाएं वर वधु को दी जाती है वह लेते हुए शादी करानी चाहिए।
विवाह के मंडप को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जाए
मंडप की सजावट पर हरि हरि मणियों के पन्ने के पत्ते ,कुछ फल, माणक के फूल ,पान के पत्ते, मोतियों , विशेष करके लाल हरे ,सफेद , और फिरोजी रंग का सामान उपयोग कर संभव हो तो। कमल के फूल, आम के पत्ते, रेशम की डोर, पताका, तोरण, मणियों की झालर ,हल्दी, दूब, और फूलों की मालाओं का प्रयोग कर सजाया जाए।
आसपास के क्षेत्रों में चंदन, केसर ,कस्तूरी ,और कपूर से मिला एक सुगंधित द्रव्य का निर्माण कर उस का छिड़काव किया जाए। शादी का मंडप एक मंदिर की तरह होता है, जहां भगवान विष्णु का कलश, और सभी देवी ,देवताओं, का स्थान बनाया जाता है, उनका आह्वान किया जाता है, इस पर कोई भूल से भी चप्पल पहन ना चढ़े ,इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए।
मिला दहेज खूब बांट कर खुश होना
दहेज में मिली वस्तुओं को वधू पक्ष से ले और उनमें से जो वस्तु परिवार में आने वाले मेहमान और आयोजन में संबंधी सम्मिलित लोग हों ,जो उन्हें पसंद हो, जिसे जो अच्छा लगे उसे बांट दें, अगर संभव हो तो उससे दुगुना बांटें।
विवाह के बाद भी दो–तीन दिन सब परिवार के लोग साथ रहे तो अति आनंद का माहौल बना रहता है विवाह के बाद दूसरे दिन प्रातः काल, दाल भात और गाय का घी ,दही की छाछ ,भोजन के लिए और साथ में नाना प्रकार के व्यंजन परोसे जाएं और सभी मौजूद बारातियों को प्रसन्न किया जाए तो अति उत्तम रहता है।
फिर अंत में पान भी बारातियों को दिया जाए और उनका मान बढ़ाया जाए। प्रतिदिन सुबह–शाम संगीत कार्यक्रम कर इस विवाह समारोह के सभी अतिथियों का बहुत प्रकार से मेहमान नवाजी की जाए तो यह अति उत्तम सौभाग्य बनता है, आनंद देता है, खुशियां देता है, और यादगार बना देता है।
बाद में जैसे-जैसे जो जो जाना चाहे उन्हें बहुत प्रकार से तरह तरह के पकवान और भोजन उनके साथ दिए जाए।
अतिथियों में जो ब्राह्मण देव रहते हैं उन्हें भी भरपूर वस्त्र और भोजन सामग्री देकर विदा किया जाए।
इसके बाद जब विदाई का समय आए तब वधु के पिता समधी को यह कहते हुए विदा करें कि आप से संबंध होने से हम और बड़े हो गए हैं, हमारा नाम और बढ़ गया है,,ऐसा करने से दोनों में बड़ी प्रसन्नता बढ़ती है।
विदाई के समय माता अपनी पुत्री को गले लगा कर आशीर्वाद दे ,गोद में उठाकर प्रेम करें ,गले से लगाए,और उन्हें शिक्षा दें। तुम अपने पति की प्यारी बनो, तुम्हारा सुहाग अचल हो, अपने सास–ससुर ,गुरु की सेवा करना, पति के रुख को देखकर ही उनकी आज्ञा का पालन सदैव करना।
इस रिश्ते को सफलतापूर्वक निभाने के लिएसमय समय पर कुछ ब्रेक लेना भी बहुत ही आवश्यक है। कुछ दिनों तक अगर हम इस रिश्ते में दूरियां बनाना सीख ले अलग रहना भी सीख ले तो यह हम दोनों के रिश्ते को नए मुकाम तक,नई खुशियां ,नई ऊर्जा फिर से दे सकते हैं।
शादी कोई event नही।
याद रखें शादी कोई इवेंट नहीं शादी पुरानी पीढ़ी की याद है ,नई पीढ़ी का स्वागत है ऐसी शादी महान है। शादी के समय कितने रिश्तेदार आए यह दर्शाता है कि हमने अपने जीवन में कैसे रिश्ते कमाए।
धन्यवाद
जय श्री कृष्ण ……..



































































































































































































