Decision

निर्णय लेना क्या है | what is decision making | Nirnay lena kya hai

प्रकट हुई किसी परिस्थिति या विषय वस्तु के समाधान को निर्णय कहा जाता है। इसdecision making दौरान हम सबसे पहले परिस्थिति या विषय वस्तु को गहन अध्ययन करें, फिर उसके ऊपर निर्णय लेने का काम करें।

निर्णय लेने का अर्थ है,किसी संकल्प पर पहुंचना और उसके अनुसार अपने काम को गति देना।जब हम विचार और तर्क के द्वारा कई तरह के विचारों में से एक विचार का चयन करते हैं,तब वह हमारा संकल्प निर्णय बनता है।

निर्णय से तात्पर्य है हम सबसे पहले परिस्थिति या विषय वस्तु को गहन अध्ययन करें, फिर उसके ऊपर निर्णय लेने का काम करें। 

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निर्णय का निर्माण और चुनौती का समाधान

हम जब जीवन में सही समय पर सही निर्णय ले पाते हैं तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं।सही समय पर सही निर्णय हमारे जीवन की सफलता समृद्धि और खुशियों को बनाकर रखता है। निरंतर हो रहे परिवर्तन को दिशा देता है। जितनी जल्दी हमारा निर्णय होता है,उतनी ही जल्दी हम समस्या का निवारण कर पाते हैं।

निर्णय हमारे दैनिक जीवन के प्रश्नों का उत्तर या परिणाम है।इस दौरान हम अपने प्रश्न के निर्णायक अंजाम पर पहुंचकर उसे क्रियान्वित करते हैं।निर्णय हमारे आगे के रास्ते बनाता है,मार्ग दिखाता है,जिस पर हमें चलना होता है।

हमारा निर्णय हमारे जीवन में सवेरे आंख खोलने से शुरू होता है,और सोने से पहले तक हमें निर्णय लेकर ही सोना पड़ता है। आखिरी निर्णय लेकर सोने तक दिन की समाप्ति करनी पड़ती है। हमारा जीवन कदम कदम पर निर्णय पर ही निर्भर रहता है।हम कितना समय,किसी निर्णय को लेने में लगाते हैं,यह बहुत मायने रखता है।

निर्णय लेने की प्रक्रिया(Decision making process)

1.) सभी संभावित विकल्पों को लिखें (सभी का मतलब सभी)

इस निर्णय को लेने के दौरान हम जितने संभव रास्ते हो उन सभी को हम अपनी डायरी या किसी कागज पर लिखें,और सभी रास्तों को लिखें जो हो सकते हैं,जो जो उत्पन्न हो सकते हैं,जो संभव हो,उसके बाद हमें उस निर्णय तक पहुंचना आसान हो जाता है।उससे हमें किसी तरह का इस बात का पछतावा नहीं रहता कि शायद हम यह भी कर सकते या वो भी कर सकते थे और हम कर नहीं पाए।

2.) अब उन सभी चीजों को एकत्रित करे जिन्हे आप खत्म कर सकते हैं

जिस तरह हम कोई शर्ट या ड्रेस खरीदने जाते हैं तो rak में लगे 50 शर्ट में से कोई 8-10 शर्ट अलग रखते हैं,फिर धीरे-धीरे उसमें से कुछ अलग कर देते हैं फिर कुछ अलग करके,जब दो या तीन बचती है उसमें से फिर हम एक का निर्णायक संकल्प लेकर उसे खरीदते हैं।उसी तरह हमारे जीवन के निर्णय भी चलते हैं।एक बार सब कुछ लिखने के बाद फिर उसमें से हमको जो जो एकदम बेकार लगे उन्हें हटायें,फिर दूसरी बार,फिर कुछ बेकार निर्णय को हटाऐं।

3.) 2 या 3 विकल्पों में से चयन करे कि किसमें लाभ या हानि है..

बचे हुए तीन या चार विकल्पों में से हम एक-एक करके सब का चिंतन करें,उसके लाभ और हानि पर चिंतन करें,उसके परिणामों पर चिंतन करें,फिर हम एक-एक करके,और दो को हटा सकते हैं।

4.) अंत में अगर हमारे पास समय हो तो अपने अवचेतन मन को हर संभव जिम्मेदारी दें

इसके उपरांत भी 3 या 2 या 1 में से हम निर्णायक जगह पर यदि नहीं पहुंच पा रहे हैं और हमारे पास यदि समय हो तो हम अपने अवचेतन मन को सोने से पूर्व इसके बारे में बताएं,धीरे-धीरे हमारा अवचेतन मन ही हमें तीन चार पांच दिन में, डिसीजन लेने की क्षमता प्रदान करता है।

  • इस बात की गारंटी कोई नहीं ले सकता कि हमारे निर्णय सही ही होंगे

5.) कार्रवाई करें, अभी शुरू करें।

जो निर्णय हमें सही लगे उसके पर,हम काम शुरू करें,आगे बढ़े,वक्त और परिस्थितियां,अपने आप हमें आगे का रास्ता दिखाती रहेंगी।

6.) अपनी निर्णय लेने शक्ति में सुधार करें

जब हम ज्यादा निर्णय लेने लगते हैं,तब हमारी क्षमता भी बढ़ती चली जाती है।हम इतने अच्छे निर्णय और सही निर्णय लेते चले जाते हैं,और इससे हमारी निर्णय लेने की क्षमता बहुत मजबूत हो जाती है, बढ़ जाती है।

इस skill को युवा होते ही सीखने की भी जरूरत है क्योंकि हम जो भी बनते हैं हमारे निर्णय लेने की प्रभावी ताकत की वजह से ही बनते हैं।जब तक हम निर्णय लेना नहीं सीखते तब तक हमारी उन्नति भी संभव नहीं हो पाती।

7.) क्या होता है जब हम कोई निर्णय नहीं ले पाते

जब जब हम कोई निर्णायक निर्णय नहीं ले पाते तब तब हमारी शक्ति का हास होता है, हनन होता है।हमारा विचार तर्क वितर्क की मानसिकता में उलझे रहता है।हमारी व्यर्थ ऊर्जा उन विचारों में उलझी रहती है,जो घटना अभी घटी ही नहीं,और परिणाम में हम दुखी रहने लगते हैं। कुल मिलाकर निर्णय न लेना पाना ही हमारे जीवन में चुनौतियों का भंडार लगा देता है।

इस दौरान ऐसा भी देखा जाता है अगर हम समय रहते कोई निर्णय नहीं ले पाते तो परिस्थिति वश हमें अचानक आवेग में आकर निर्णय लेने पड़ते हैं,जो कई बार और गलत हो जाते हैं,और वो हमारी मानसिक शांति को नष्ट कर देती है।

कई बार ऐसा भी देखने में आता है कि हम निर्णय लेने की विषय वस्तु को टालते रहते हैं इस वजह से भी हमें और अधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। इसलिए कुल मिलाकर हमें निर्णय को सही समय पर गलत या सही कैसा भी हो ले ही लेना चाहिए,और जब हम निर्णय ले ले तो उसे सही साबित करने के लिए काम करें।

कई बार चुनौती की स्थिति में यह बात देखने में आती है जब हम किसी परिस्थिति में निर्णय नहीं ले पाते हैं,तब असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो जाती है,इसलिए हम निर्णय जरूर लें,उसके समाधान का पूरा प्रयास करें,और उसकी योजना बनाकर उस पर काम शुरू कर दें।

निर्णय लेने के समय इस बात का जरूर ध्यान रखें कि हम किसी से सलाह लेकर इस बात को जरूर जाने कि हम जो भी निर्णय लेंगे,वह हमारा स्वयं का रास्ता होगा,उस रास्ते पर हमें स्वयं चलना है,और उस रास्ते की सारी जिम्मेदारी हमारी खुद की है।

8) जब हम निर्णय नहीं लेते हैं तो देरी हो जाती है

यह बात भी हमेशा हमें याद रखे कि यदि हम अपना डिसीजन नहीं लेते तो,फिर दूसरे हमारा निर्णय लेते हैं,और वही हमें मानना पड़ता है

सही निर्णय लेने का अनुभव हमें निर्णय लेने की क्षमता के बाद ही आता है,हम अपने गलत निर्णय से ही सही निर्णय लेना सीखते हैं।

9.) निर्णय हमेशा सही क्यों होना चाहिए, भावना से नहीं?

निर्णय लेने के समय हम एक चीज का और ध्यान रखें जो हमें खुशी देता हो ऐसा निर्णय हम ना ले बल्कि जो हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचाता हो वो ही निर्णय लें। क्षणिक खुशी वाला निर्णय कुछ समय खुशी देकर फिर दुख में बदल जायेगा,और जो हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचाएगा और हमें आनंदित करेगा।

10.) इसके अलावा हम सब क्या कर सकते हैं

हम परमात्मा को मस्तिष्क के धरातल पर छवि बना कर उन्हें बैठाएं,और उनसे ध्यान के द्वारा विचार विमर्श करें उन्हें अपनी सबसे मोतियों को बताएं इससे निश्चित रूप से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ जाएगी।

कुल मिलाकर आज की वर्तमान स्थिति में जब सारी स्थितियां भी अनसर्टेन है और हमारे पास्ता में भी अनिश्चित है और हमें परिणाम जो आने वाले हैं वह भी कुछ अनिश्चित तरह के ही दिखाई देते हैं ऐसी स्थिति में निर्णय लेना थोड़ा डर वाला तो होता है

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11.) निर्णय तभी ले जब आपका दिमाग शांत और ठंडा हो !!

हर पल जीवन में निर्णय लेना पड़ता है।इसलिए निर्णय लेना सीखना हमें बहुत जरूरी है। चुनौती की स्थिति में जब हमारा मन व्याकुल हो, मन के कोई उथल पुथल के समय हम कोई निर्णय न लें अपने मन को धीरे-धीरे शांत करने का प्रयास करें। जिस तरह हम चलते या दौड़ते हुए खा नहीं सकते,उसी तरह अशांत मन से हम कोई निर्णय न लें। उसके बाद सारे पहलुओं पर चिंतन करके शांत मन से सशक्त निर्णय लें, जिससे हमारे भविष्य की खुशियां बनी रहती है।

12) निर्णय लेने वाले महत्वपूर्ण हैं

दिन भर में लगभग हम हजारों निर्णय लेते हैं और यह प्रक्रिया जन्म से शुरू होकर जीवन के अंत तक चलती है इसलिए इस प्रक्रिया को सीखना मेरे अनुभव से बहुत ही जरूरी है। इसे हमारी विद्या में छात्र जीवन से ही पढ़ाना और विद्यार्थियों को समझना बहुत बहुत जरूरी है। इस पर हमारा प्रशासन ध्यान दे,ताकि हमारे बच्चे और आने वाली पीढ़ी और दबंग बने,देश में खुशहाली हो लोग अधिक से अधिक अच्छे निर्णय लेने के महत्व को समझ सके, सक्षम बनें, देश में खुशहाली आए, आत्मनिर्भर बने, खुशियां ही खुशियां बढ़े।

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हम भावना में बह कर निर्णय न लें

अगर हम निर्णय लेने में सक्रिय होते हैं तो हमारा आने वाला कल हमारे मन के अनुसार और उज्जवल होता है।

हमारा एक निर्णय हमारी जिंदगी बदल सकता है।

डर की वजह से निर्णय ना लेना बहुत गलत है।

निर्णय जल्दी लें,और सूझ बुझ कर लें।

अच्छा निर्णय लेना अनुभव से आता है और अनुभव गलत निर्णय लेने से आते हैं।

जय श्री कृष्ण

Thank you

Nirmal Tantia
Nirmal Tantia
मैं निर्मल टांटिया जन्म से ही मुझे कुछ न कुछ सीखते रहने का शौक रहा। रोज ही मुझे कुछ नया सीखने का अवसर मिलता रहा। एक दिन मुझे ऐसा विचार आया क्यों ना मैं इस ज्ञान को लोगों को बताऊं ,तब मैंने निश्चय किया इंटरनेट के जरिए, ब्लॉग के माध्यम से मैं लोगों को बताऊं किस तरह वे आधुनिक जीवन शैली में भी जीवन में खुश रह सकते हैं

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