Finished your stress,anxiety is goal of happy human life
Erase your Stress
चिंता को मिटाना (Finished your stress),प्रसन्न रहना,इस ब्रह्मांड के नायक को जानना यही मानव जीवन का उद्देश्य है और इसकी समझ होना,इसे जानना ,इसे सीखना ही मानव जीवन की सफलता भी कही जा सकती है। यही मानव जीवन का दर्शन है।
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हम कितना जीते हैं या कैसा जीते हैं
हम मानव जीवन को कितना लंबा जीते हैं,इसका महत्व नहीं, किंतु कितना खुशहाल जीवन जीते हैं, इसका अधिक महत्व है। जीवन तो सभी जीते हैं किंतु खुश रहकर जीवन बिताना,मानव जीवन को समझना,उसका अर्थ जानना,इसका उद्देश्य समझना,यही मानव जीवन की सार्थकता है।
मानव को मिला उपहार
हर मानव को जन्म के साथ तीन शक्ति मिलती है,बल यानी करने का बल,विवेक यानी जानने का बल ,विश्वास यानी मानने का बल ,और इन सब शक्तियों के सदुपयोग की स्वाधीनता भी हर मानव को मिलती है। इन शक्तियों के सदुपयोग से हर मानव अपना जीवन खुशहाल बना सकता है,और इन सबका यदि वह दुरुपयोग करे तो उसके जीवन से दुख नहीं जा पाता।
तुलना करना
मानव की तुलना किसी देवता से करना मानव का अपमान है।इस मानव तन का दुरुपयोग करने वाले को अमानव हम कह सकते हैं,और इस अमानव की पशुओं से तुलना करना इन पशुओं का अपमान कहा जा सकता है।
नर तन अनमोल
मानव तन अनमोल है यह किसी विशेष उद्देश्य से हमको मिलता है जब हम कई जन्मों के अपने दुष्कर्म का नाश करते हैं,तब परम सता हमें इस मानव तन को प्रदान करती है
मानव की शक्ति
इस मानव जन्म के सफलता का यही रहस्य है की वो सोई हुई मानवता का उपयोग करे या उसे जगाये,और अपने जीवन में सेवा त्याग और प्रेम को जीवन मे अपनाये।सेवा का मतलब करने की शक्ति का उप्योग से है।
संयोग और वियोग की यात्रा
किसी भी वस्तु का संयोग होते ही उसके वियोग की तैयारी शुरू हो जाती है। इस संसार की हर चीज हमारे साथ जुड़ते ही उसका वियोग होना शुरू हो जाता है,यानी हमको अपने मन में समझ लेना चाहिए की जो हमको मिला है,वह निश्चित ही छूटेगा और इसलिए उसमें हम ज्यादा लिप्त ना हो,इस तरह मानव जीवन को समझना अति आवश्यक है।
परिवार के साथ खुश रहकर जीवन जीने की कला ||
अच्छा मानव बनने के लिए सबसे पहले अपने परिवार के साथ जीवन जीने को सीखें
परिवार की सेवा करना और उनको प्यार देना,उनको जो चाहिए<,अगर संभव हो तो उसे अपने सेवा द्वारा उनकी जरूरत को पूरा कर देना।परिवार के लोगों को जो आपसे चाहिए वो उनको दें, और बदले में उनसे कुछ ना चाहें,उनके काम आ जाये और उनसे किसी तरह की प्रेम या आदर की आशा न रखे।उनको प्रेम दें और बदले में उनसे प्रेम की भी आशा न रखे।अपने परिवार के साथ रहते हुए ही हम इन बातो का अमल करना शुरू करें।
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परिवार को प्यार दें,दिया हुआ प्यार कभी व्यर्थ नहीं होता||
परिवार के सदस्य के अधिकार की रक्षा से प्यार मिलता है। उनको प्यार देने के लिए अपने पास जो है उससे ही उनकी सेवा कर दे,और बदले में उनसे कुछ आशा न रखे । उनके कल्याण और हित की भावना को मन ही मन रखना और यदि उनके अंदर अगर कोई बुराई भी हो तो उस बुराई के लिए मन में उनके लिए गलत चिंतन ना करना।
परिवार के सदस्यों के दोष को स्वीकार करे
परिवार के सदस्यों के दोष को प्रसन्नता पूर्वक सहन करना,प्यार से उनके दोष को प्यार देकर दूर करने का अथक प्रयास करना,और फिर अंत में उनके सुधार के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना।
परिवार के सदस्यों को ठीक कैसे करें
परिवार,उस परम शक्ति से मिलने की ट्रेनिंग स्कूल है ,परिवार के सदस्य को पहले चर्चा करके समझाने का प्रयास करना,फिर उनके अंदर मौजूद आत्मा को मन ही मन प्रणाम करना,और प्रभु से प्रार्थना करना की वे उस सदस्य पर कृपा करें,दया करें।प्रणाम के द्वारा उनके हृदय में विराजमान परमात्मा को मन ही मन प्रणाम करना शुरू करें।
अगर संभव हो तो,दिन भर में पांच बार मन मन मे उनको प्रणाम करना,मन में उनके प्रति सेवा की भावना रखना और मौका मिलते ही उनकी सेवा कर देना और सेवा के बदले में कुछ नहीं चाहना। न अभी चाहना ना कभी चाहना। उनसे स्वयं सेवा भी तभी लेना जब सामने वाले की उस सेवा को करके प्रसन्नता मानता हो।
मानव जीवन का परम उद्देश्य है कि वह प्रसन्नता पूर्वक हंसी-खुशी से अपना जीवन गुजारे र जब हम दुनिया से जाए तब दुनिया वाले यह कहें कि वाह क्या जीया।
जय श्री कृष्ण
धन्यवाद



































































































































































































